शारदे वन्दना

 *शारदे वन्दन


*आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये।*

*विश्वहित,ज्ञानशुभ,दानदे जाइये।।*


ज्ञान की, देवि शुचि,श्वेत हंसासिनी।

शीलदा, गीत गा, कवि हृदय वासिनी।।

ज्योंति हो, मम हृदय,आपकी भारती।

आपही,विश्व में, ज्ञान हो पारती।।

ज्ञानको,मान्यता,आप दिलवाइये।


आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये।

विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।।


पद्म पर, राजतीं,श्वेत वक्त्रा तुम्हीं।

कर फटिक,माल है,ज्ञान शस्त्रा तुम्हीं।।

वेद की,भाषिणी, हाथ वीणा लिए।

ब्रह्म की,तोषिणी,सोम रस हो पिए।।

आज सुत,को सुधा,काव्य अन्हवाइये।


आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये।

विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।।


कृष्ण को, वेणु दी, आपने शारदे।

व्यास को,विज्ञता ,ज्ञान विस्तार दे।

गीत में, कृष्ण ने, ब्रह्म गीता कही।

व्यास ने, लेखनी,शुचि मधुरता लही।।

'नित्य' में,अब वही, विज्ञता लाइये।


आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये।

विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।।

🖋️

नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

टिप्पणियाँ

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. आप लाजवाब है , आपका कोई जवाब नही।
    आप साहित्यिक क्षेत्र में भगवान भास्कर की भाँति है। जिसके प्रकाश मात्र से हम जैसे छोटे-दीये टिमटिमा रहे है। आप धन्य है गुरूदेव।
    आपको कोटि कोटि प्रणाम।🙏🙏

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नित्यानन्द वाजपेयी एक साहित्यिक परिचय

ग़ज़ल