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आंग्ल नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

 *आंग्ल नववर्ष की शुभकामनाएं*  यह है उत्सवधर्मी भारत,               अपने लाखों उत्सव महान। संघर्षों में जीवन अपना ,               है सबसे उत्तम उपादान।। खुदके क्या और दूसरों के,                हम उत्सव अपना लेते हैं। खुश रहना अपनी फितरत है ,             इस लिए सदा खुश रहते हैं।। यह नया वर्ष यद्यपि ईसा ,                 फिर भी बधाइयां स्वीकारो। अपना कब है यह याद रखो ,               इसपर ही मत ठुमके मारो।। माना यह बहुत प्रसिद्ध हुआ,               पाश्चात्य सभ्यता के कारण। लेकिन निजसंस्कृति मत भूलो,                 इस दुश्चरित्रता के कारण।। मैं तो कवि उत्सवजीवी हूँ ,                 इसलिए हर्ष मुझको भी है। जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ,     ...

वर्ष 2020

 वर्ष 2020 जा रहा है * *ये साल हमेशा याद रहेगा ....* कहते है वक्त  आलेख समय जैसा भी हो गुजर ही जाता है , मगर अपने साथ कुछ ले जाता है तो कुछ छोंड़ जाता है जी हां मैं बात कर रही हूँ बीते हुए साल की जिसने हमे रुलाया भी और हंसाया भी या यूं कहें कि साल दो हजार बीस कई मामले मे ऐतिहासिक रहा कुछ मुख्य घटनाएँ जो देश और दुनिया की सूरत और सीरत दोनो बदल दी उनपर नजर डालते हैं । साल 2020 की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध के साथ हुई थी, लेकिन फरवरी आते-आते विरोध की आंच इतनी ज्यादा बढ़ गई कि दिल्ली इसकी चपेट में आकर झुलस गई। दरअसल, 23 फरवरी से 29 फरवरी तक दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगा होता रहा। इस दौरान 53 लोगों ने जान गंवाई,इस दौरान कड़ाके की ठंड के बीच शाहीन बाग में सैकड़ों महिलाएं सीएए और एनआरसी के विरोध में महीनों तक सड़क पर बैठी रहीं। कुछ विपक्षी पार्टियों के शासन वाले राज्यों ने तो सीएए के विरोध में विधानसभा से प्रस्ताव पारित करा कर नयी परम्परा शुरू की जिसके तहत संसद से पारित विधेयक के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया। नये साल की शुरुआत में देश को सेनाध्यक्ष के रूप मे...

शारदे वन्दना

 * शारदे वन्दन *  *आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये।* *विश्वहित,ज्ञानशुभ,दानदे जाइये।।* ज्ञान की, देवि शुचि,श्वेत हंसासिनी। शीलदा, गीत गा, कवि हृदय वासिनी।। ज्योंति हो, मम हृदय,आपकी भारती। आपही,विश्व में, ज्ञान हो पारती।। ज्ञानको,मान्यता,आप दिलवाइये। आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये। विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।। पद्म पर, राजतीं,श्वेत वक्त्रा तुम्हीं। कर फटिक,माल है,ज्ञान शस्त्रा तुम्हीं।। वेद की,भाषिणी, हाथ वीणा लिए। ब्रह्म की,तोषिणी,सोम रस हो पिए।। आज सुत,को सुधा,काव्य अन्हवाइये। आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये। विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।। कृष्ण को, वेणु दी, आपने शारदे। व्यास को,विज्ञता ,ज्ञान विस्तार दे। गीत में, कृष्ण ने, ब्रह्म गीता कही। व्यास ने, लेखनी,शुचि मधुरता लही।। 'नित्य' में,अब वही, विज्ञता लाइये। आइये, पूज्य माँ,  शारदे  आइये। विश्व हित,ज्ञान शुभ,दान दे जाइये।। 🖋️ नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'