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भजन

*सिंधु छंद*💐 *किनारे राम ने भव से लगाना है।* *उन्हीं के नाम से बैकुंठ पाना है।।* *सियावर सौम्य सुंदर नील कंजारुण।* *लिए माँ जानकी नीहारिका से गुण।।* *सिया के नैन चातक मेघ रघुनंदन।* *कुसुमलतिका किये ज्यों वृक्ष आलिंगन।* *चकोरी ताकती हो चंद्रमा जैसे।* *सिया छवि राम की मधुमय लखें वैसे।।* *विपुल शोभा सियावर राम रघुवर की|* *लखन,शत्रुघ्न, श्री हनुमान बलधर की||* *भरत छविधाम के पीछे सुहाते हैं|*  *नयन अभिराम की शोभा बढ़ाते हैं||* *दयामय दृष्टि भक्तों पर हमेशा है।* *दुखों का नाश हो शुभ रूप ऐसा है।।* *लखें हनुमान पद-नख राम के प्यारे।* *लगें चन्द्रार्क झाँकें व्योम से न्यारे।।* *कहूँ शुचि नील कुबलय ओस से गीले।* *चमकते नीलदल की कोर पर पीले।* *प्रभो के पैर के नाखून की शोभा।* *रहे हनुमान मन इनमें सदा लोभा।।* ✍🏾🌹🫐 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

ग़ज़ल

ग़ज़ल देख के मुझको सिहरता है तो हँस देते हैं। वो मुहल्ले से गुज़रता है तो हँस देते हैं।। उसने कुछ ख़ास निभाया तो नहीं इश्क़ मेरा। यूँ ही बस बात वो करता है तो हँस देते हैं।। ज़ख्म लाखों हैं मेरे दिल पे उसी खंज़र के। फिर भी वो  मुझमें उतरता है तो हँस देते हैं।। दर्द  वो  मेरा  दवा  तो न  मुझे  हो पाया। ज़िस्म में अब भी बिखरता है तो हँस देते हैं।। वैसे  बदनाम  सरेआम  मुझे   करता  वो। फिर भी इस दिल में ठहरता है तो हँस देते हैं।। 'नित्य' बेदाग़ मेरे इश्क़ का परचम है जो। चीथड़ों  में  भी  लहरता  है तो हँस देते हैं। ✍️ नित्यानन्द  उपमन्यु वाजपेयी

युद्ध गान

*युद्ध गान* लहरता तिरंगा हमारा निशान। बने विश्व में सर्वदा कीर्तिमान।। विजय घोष से गूँजता आसमान। मिटा दे सदा शत्रुओं का गुमान।।  बढ़ा छीनने भूमि को आज चीन। बजाता फिरे विश्व में स्वार्थ बीन।। हुआ मंदमति प्राण ममता विहीन। बढ़ो वीर लो युद्ध में प्राण छीन।। हनो तीव्र तलबार लो काट शीश। चढ़ा चंडिका देवि को बन महीश।। करो राष्ट्र रक्षा उठो हे सुवीर। महाशत्रु के वक्ष को चीर-चीर।। बहुत हो गया बुद्ध का शाँति गान। उठाओ सुदर्शन व लो शीश दान।। परशुराम के तूण से माँग बाण। उठा शूल शिव का करो राष्ट्र त्राण।। घुसो शत्रु के क्षेत्र का छिद्र भेद। मिटाओ चतुर शत्रु को खेद- खेद।। कटे मुंड फिर भी लड़े रुंड-रुंड। गिरा कर गिरे शत्रु का झुंड- झुंड।। नमन है तुम्हें वीर हे! वीर्यवान। करो या मरो तब बने शौर्य शान।। नहीं पग रुके मग यही है पुनीत। विजय वीरगति हर तरफ जीत-जीत।। ✍🏾 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'