युद्ध गान
*युद्ध गान*
लहरता तिरंगा हमारा निशान।
बने विश्व में सर्वदा कीर्तिमान।।
विजय घोष से गूँजता आसमान।
मिटा दे सदा शत्रुओं का गुमान।।
बढ़ा छीनने भूमि को आज चीन।
बजाता फिरे विश्व में स्वार्थ बीन।।
हुआ मंदमति प्राण ममता विहीन।
बढ़ो वीर लो युद्ध में प्राण छीन।।
हनो तीव्र तलबार लो काट शीश।
चढ़ा चंडिका देवि को बन महीश।।
करो राष्ट्र रक्षा उठो हे सुवीर।
महाशत्रु के वक्ष को चीर-चीर।।
बहुत हो गया बुद्ध का शाँति गान।
उठाओ सुदर्शन व लो शीश दान।।
परशुराम के तूण से माँग बाण।
उठा शूल शिव का करो राष्ट्र त्राण।।
घुसो शत्रु के क्षेत्र का छिद्र भेद।
मिटाओ चतुर शत्रु को खेद- खेद।।
कटे मुंड फिर भी लड़े रुंड-रुंड।
गिरा कर गिरे शत्रु का झुंड- झुंड।।
नमन है तुम्हें वीर हे! वीर्यवान।
करो या मरो तब बने शौर्य शान।।
नहीं पग रुके मग यही है पुनीत।
विजय वीरगति हर तरफ जीत-जीत।।
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नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
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