नववर्ष
*बाय बाय ,, 2020 स्वागतम् 2021* 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃 सन दो हजार है बीस प्रबल , संघर्षों को सिखलाया है अपनेपन रिश्ते नातों का , इसने एहसास कराया है कीमत समझी है रोटी की , धीरज धरना भी सीख लिया भूँखे रह रहकर के हमने , अरि से लड़ना भी सीख लिया पढ़ने सीखे है धर्म ग्रंथ , पूजा जप तप करना सीखा ब्यूटी पार्लर श्रृंगार बिना , हर स्त्री ने रहना सीखा बूढ़े पितु मातु बहन भाई , गुरु मित्र साथ पल बीते है स्नेह श्रेष्ठ जन का पाकर , बोलो हम क्यों फिर रीते है जिनके खर्चे रहते अपार , होटल में भोजन करते है बिन आइस्क्रीम चाट टिक्की , के भी बच्चे रह सकते है ये सच है हम भयभीत हुए , कृंदित हो होकर चीखे है संयम समता सत्कर्म शौर्य , संस्कार सभ्यता सीखे है हम राम कृष्ण के वंशज है , हम कालकूठ पीने वाले कर राजभोग का त्याग और , जंगल में हम जीने वाले हम है भैरव के वीरभद्र हम शेष नाग अवतारी है हम धर्म ध्वजा के रक्षक है बजरंगी सम बलधारी है हम परशुराम सम हैं क्रोधी मर्यादित है प्रभु के समान वेदों के हम अनुसार चले अनुशासित मेरा खानदान कर दमन नहीं यमराज सके हम ही तो कहलाए अदम्य यम को पाटी में बाँधा था ऐसे निज पुरखे थे प्रणम्य इसलिए व्यर्थ चिंता त्यागो खप्पर भर अरि का पियो शोण खींचो शिव शंकर का पिनाक मत पुत्र मोह में बनो द्रोण सुख दुख में एक समान रहो मत शीत रहो मत रहो ग्रीष्म तुम बनो कर्ण सम दानवीर तुम दृढ़ प्रतिज्ञ हित बनो भीष्म कम खर्चे में रहना सीखो आपत्ति देखकर नहीं ढहो प्रातः कर नित स्नान ध्याान जय जय जय जय श्री राम कहो ले सको लीजिए सीख मित्र जो मैने गान सुनाया है यह मत सोचो क्या खोया है सोचो कितना क्या पाया है मृत्युञ्जय देव शुक्ल ________________
जयति शारदे।
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