ग़जल

 


 *विधा -- गजल* 


मुझमें' जलने की'आस रहने दो,

तुम मुझे आसपास रहने दो।।


तुम शमा हुश्न की यक़ी मेरा,

मेरी' शिद्दत में' प्यास रहने दो।।


रौशनी तुम से' है ज़माने में ,

मेरे' दिल में उजास रहने दो।


मैं रहा आज़ तक सुनो बेदर,

अब मुझे और ख़ास रहने दो।


'नित्य' बहता रहा तुझी में तो,

फ़िर भी' ग़र है उदास रहने दो।


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नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

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