ग़जल
*विधा -- गजल*
मुझमें' जलने की'आस रहने दो,
तुम मुझे आसपास रहने दो।।
तुम शमा हुश्न की यक़ी मेरा,
मेरी' शिद्दत में' प्यास रहने दो।।
रौशनी तुम से' है ज़माने में ,
मेरे' दिल में उजास रहने दो।
मैं रहा आज़ तक सुनो बेदर,
अब मुझे और ख़ास रहने दो।
'नित्य' बहता रहा तुझी में तो,
फ़िर भी' ग़र है उदास रहने दो।
🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️🖊️
नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें