नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु": एक साहित्यिक परिचय यह रिपोर्ट समकालीन हिंदी साहित्यकार नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु" के साहित्यिक जीवन, उनकी कृतियों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर, यह उनके नाम से जुड़ी प्रतीकात्मक गहराइयों और उनके साहित्यिक योगदान की प्रकृति को समझने का प्रयास करती है। 1. परिचय: नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु" नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु" हिंदी साहित्य के एक समकालीन हस्ताक्षर हैं, जिनकी पहचान मुख्य रूप से एक कवि और ग़ज़लकार के रूप में है। उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों में "शस्त्र से शास्त्र" (काव्य संग्रह) और "मुट्ठी भर हिमालय" (गीत ग़ज़ल संग्रह) शामिल हैं 1। कुछ साहित्यिक संदर्भों में उन्हें "नित्यानन्द वाजपेयी नीलकंठ °उपमन्यु°" के रूप में भी संदर्भित किया गया है 4। उनकी रचनाएँ अर्णव पब्लिकेशन्स जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशन गृहों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जो हिंदी साहित्य में उनकी सक्रिय भागीदारी को पुष्ट करता है 3। नाम और उपाधि का म...
ग़ज़ल ज़िंदगी बनके मुझे प्यार सिखाने आई। छोड़कर सबको मेरा साथ निभाने आई।। इतने दुख-दर्द सहे तूने सृजन की ख़ातिर। ख़ुद सिमट कर मेरा विस्तार बढ़ाने आई। अपने पंखों की उड़ानों को मुझे सौंप दिया। आसमानों की मुझे सैर कराने आई।। मेरी हमदम तू मेरी हम नशीन बनकर के। मुझको हैवान से इंसान बनाने आई।। तू न होती तो फ़िज़ाओं में न रंगत होती। मुझसे मरुथल को गुलिस्तां सा सजाने आई।। ख़ुद तो शीशे सी कई बार है टूटी बिखरी। फिर भी पत्थर को तू भगवान बनाने आई।। मेरी हम-नफ़्स मेरी जाने तमन्ना है जो। 'नित्य' वो मुझमें सिमट करके समाने आई।। ✍🏾🌸🌸🌸🌸🌸🌸 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
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