गीत
*गीत*
फिर जगी आज प्यार की लत है।
रात भर फिर चकोर सी गत है।।
माहताबी तुम्हारी शबनम सी।
गा रही हैं कली पे सरगम सी।।
हो रही फिर हसीन बरक़त है।।
फिर जगी आज प्यार की लत है।
रात भर फिर चकोर सी गत है।।
रागिनी ने मधुर बजाई धुन।
फिर पपीहा गुमान में है सुन।।
हुश्न की फ़िर हुई निज़ामत है।
फिर जगी आज प्यार की लत है।
रात भर फिर चकोर सी गत है।।
रूह भी ज्यूँ सिहर गयी अब तो।
ज़िस्म से जाँ निकल गयी अब तो।।
होश खोती हुई मुहब्बत है।।
फिर जगी आज प्यार की लत है।
रात भर फिर चकोर सी गत है।।
है जवां दिल कहीं बहक जाए।
कोइ शोला अग़र दहक जाए।।
बन पड़ी आपको तिज़ारत है।
फिर जगी आज प्यार की लत है।
रात भर फिर चकोर सी गत है।।
नित्यानन्द वाजपेयी।✍️🌹
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