यशोगान
*गीत*
मुक्त कण्ठ से आज सुनो मैं, वीर प्रसंशा गाता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
जिनने भारत की रक्षा हित,अपने प्राण गँवाये हैं।
जिनकी माता नें समुद्र भर, अपने अश्रु बहाए हैं।।
उनकी गाथा गायन कर के, तुमको आज रुलाता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
चंद्र,भगत,बिस्मिल,सुभाष जी,अपनी माँ के बेटे थे।
इसीलिए अंग्रेज हजारों ,पड़ते उनसे हेटे थे।।
ठान लिया करके दिखलाया,साहस पे बलिजाता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
भारत की मिट्टी का प्रतिकण, निज श्रोणित से सींचा था।
जर्नल डायर को ऊधम ने,मार सड़क पर खींचा था।।
ऐसे वीर शिरोमणियों के ,करतब कह दोहराता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
उस भारत को दो टुकड़ों में, तुमने जब तोड़ा गाँधी।
तब उन शौर्यशालियों के ,मन में उट्ठी होगी आँधी।।
काश्मीर पर वोट बैंक हित,पंडित को झुठलाता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
जब कश्मीरी पण्डित की,चीत्कारें दिल दहलाती हैं।
उनकी बहू बेटियां जब,सड़कों पर लूटी जाती हैं।।
तब लोहू उन बलिदानों का,क्या कहता बतलाता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
कोटि कोटि उनको प्रणाम है, जो फाँसी पर झूले हैं।
उनके बलिदानों को लेकिन, जन अधिनायक भूले हैं।
उनके केसरिया प्रतीक को,इसीलिए लहराता हूँ।
अमर शहीदों की कुछ पीड़ा, तुमको पुनः सुनाता हूँ।।
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नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
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