राजीव दीक्षित
*छप्पय*
मानवता के हेतु,भाव सेवा का लेकर।
निकले श्री राजीव ,ज्ञान अंबुद विप्रेश्वर।।
भारत को है गर्व ,पुत्र दीक्षित पर अपने।
स्वाभिमान के नवल ,दिखाए जिसने सपने।।
संभाषण से आपने,दिया अनोखा ज्ञान है।
कम्पनियाँ परदेश की,जिनका कुचला मान है।।
अंग्रेजी विष-वेल ,सोख लेती आरत को।
अगर आपसा पुत्र, नहीं मिलता भारत को।।
आयुर्वेदिक नींव, तुम्हीं ने थी दर्शाई।
रामदेव ने भव्य ,पतंजलि जिसे बनाई।।
जनजागृति के स्रोत तुम, ब्राम्हण पुत्र महान हो।
जबतक सूरज चाँद हैं,तेरे यश का गान हो।।
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नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
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