विश्व योग दिवस
*विश्व योग दिवस के पावन पर्व पर!*
गीत
*ज्ञान दीपक जला लो हृदय का मनुज,*
*रोशनी से जगत जगमगा जाएगा।*
*विश्व की आपदाएं मिटेंगी सभी,*
*हर्ष उल्लास मनको लुभा जाएगा।।*
स्वार्थ का जो अंधेरा मनों में बसा,
है निगलने लगा आज आवाम को।
लोभ-रावण खड़ा तान तलवार अब,
और ललकारता है पुनः राम को।।
यदि मिटेगा नहीं आर्थिक आचरण,
तो सुनो यह सभी को मिटा जाएगा।।
*ज्ञान दीपक जला लो हृदय का मनुज,*
*रोशनी से जगत जगमगा जाएगा।*
युद्ध है अर्थ का यह महा नाश को,
नर हुआ भौतिकी का उपासक यहां।
दंभ बारूद है दर्प बाती बना,
और चिंगारियाँ है कुशासक यहां।।
मौत का तांडवी नृत्य आतुर हुआ,
यह अखिल विश्व की जड़ हिला जाएगा।।
*ज्ञान दीपक जला लो हृदय का मनुज,*
*रोशनी से जगत जगमगा जाएगा।*
लौट आध्यात्मिक ज्ञान की ओर फिर,
सर्व कल्याण हित शोध खुद में करो।
व्यक्तिगत शुद्धतामय करो आचरण,
सर्व समभाव पथ पर कदम तुम धरो।
व्यक्ति में ब्रह्म का नित्य दर्शन करो,
जीव चैतन्य प्रभु में समा जाएगा।।
*ज्ञान दीपक जला लो हृदय का मनुज,*
*रोशनी से जगत जगमगा जाएगा।*
योग अष्टांग से नष्ट शुद्ध तन मन करो,
और पावन बनो मन वचन कर्म से।
सांप्रदायिक नहीं सार्वभौमिक बनो,
मत विमुख हो मनुज के परम धर्म से।
सर्व कल्याण की भावना हो प्रचुर,
फिर भला पैर क्यों डगमगा जाएगा।
*ज्ञान दीपक जला लो हृदय का मनुज,*
*रोशनी से जगत जगमगा जाएगा।*
✍🏾🪷🪷🪷🪷
नित्यानन्द वाजपेयी ,*"नित्योपमन्यु"*
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