मां पिता
गीत
कई पुत्रों सुताओं को सुधा ममता पिलाई है।
पिता ने और माता ने जिन्हें दुनिया दिखाई है।।
दिया है अर्श जीवन को मधुर संस्पर्श तन तन को।
खिलाने श्वेद से सींचा सुता सुत रूप उपवन को।।
निभा कर्तव्य को अपने पुहुप क्यारी सजाई है
पिता ने और माता ने जिन्हें दुनिया दिखाई है।।
हुये निर्बल अथक श्रम-साध्य जीवन ने किया जर्जर।
बहाई स्नेह की गंगा बना परिवार तब उर्वर।।
परिश्रम कर पिता-माँ उन्हें भेजी कमाई है।
पिता ने और माता ने जिन्हें दुनिया दिखाई है।।
नहीं खुद वस्त्र बनबाये न पैरों के लिए जूती।
उन्हें दी जींस थी महँगी खरीदा स्वयं को सूती।।
बनाये पुत्र सब शिक्षित सुता डॉक्टर बनाई है।।
पिता ने और माता ने जिन्हें दुनिया दिखाई है।।
उन्हीं निर्मोहियों पुत्रों सुताओं ने किया बेघर।
बिना पदत्राण के तपती दुपहरी में फिरें दर दर।।
किया फुटपाथ है बिस्तर खुला नभ ही रजाई है।
पिता ने और माता ने जिन्हें दुनिया दिखाई है।।
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नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'
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