गीत

नज़्म

*मेरी तनहाई को अंगार बनाया न करो।*
*या तो' आजाओ' या' फिर याद भी' आया न करो।।*

कितनी मुश्किल से मनाया है आज फिर मन को।
तेरी यादों ने रुलाया है आज फिर मन को।।
रब के मानिंद तू भाया है आज फ़िर मन को।
ख़्वाब मिलने का मुझे ऐसे दिखाया न करो।।
*या तो' आजाओ' या' फिर याद भी' आया न करो।।*

रेत तपती मेरे एहसासों की है धू-धू कर।
उसपे यादों की अगन जाती मुझे यूं छू कर।।
यार दिलदार मेरे वास्ते भी कुछ तू कर।
इस क़दर जिस्म-ओ- ज़हन मेरा जलाया न करो।
*या तो' आजाओ' या' फिर याद भी' आया न करो।।*

खिड़कियां तेरे ही रस्तों को निहारा करतीं।
आहटें आने का जब भी हैं इशारा करतीं।।
रातें इस गम को मेरे और उभारा करतीं
मुझमें यूं ज्वार मुहब्बत का उठाया न करो।
*या तो' आजाओ' या' फिर याद भी' आया न करो।।*

रोज तुम कहते हो कल आके मिलूंगा तुमसे।
होके दुनिया में सफल आके मिलूंगा तुमसे।।
होगा जब रब का फ़ज़ल आके मिलूंगा तुमको।।
अपनी तक़दीर को इतना भी सताया न करो।
*या तो' आजाओ' या' फिर याद भी' आया न करो।।*

✍🏾
नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु"

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