गीत

गीत

हमें आपसे कुछ शिकायत नहीं है।
मगर अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।।

गुजर  जाएगी  ज़िंदगी  जो  बची है।
तुम्हारे बिना अब तलक ज्यों कटी है।।
सज़ा दूं तुम्हें मेरी फितरत नहीं है।
मगर अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।।

सितम आपके हम उठाते रहे थे।
हमें  आप  नीचा दिखाते रहे थे।।
भले मेरी अच्छी हुई गत नहीं है।
मगर अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।।

मेरे पास यादों की सौगात है तो।
तेरी उन ज़फाओं की बारात है तो।।
लगानी मुझे तुझपे तोहमत नहीं है।
मगर अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।।

मुबारक तुम्हें हों हसीं महफिलें अब।
तुम्हें ख़ार भी फूल बनकर मिलें अब।।
भले मेरी महफ़िल में रंगत नहीं है।
मगर अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।।

✍🏾🌸🪷🌸🪷🌹🌹
नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु"

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