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शिवशंकर

गीत जय जय महेश जय नीलकंठ,  जय महादेव जय शिव शंकर। जय उमानाथ मदनारि शिवम, जय डमरूधर जय अभयंकर।। जय एकलिंग जय भस्मलिप्त, जय भूत लुभावन नील वरण। कंकन कुंडल केयूर सर्प, शोभा अनंत भव भीति हरण।। डिम-डिम डिम-डिम डमरू निनाद, नट नाथ नटेश्वर प्रतिभंकर। जय उमानाथ मदनारि शिवम, जय डमरूधर जय अभयंकर।। जय ज्ञान वापिका के प्रकाश, जय-जय हिमवंती उरविलास। औषधि विज्ञानी दीनबंधु, जय वैद्यनाथ शुचि स्वस्थ हास।। तन-मन-धन बचन कर्म से शुभ, शिव मलय-पवन शिव-मलयंकर। जय उमानाथ मदनारि शिवम, जय डमरूधर जय अभयंकर।। तांडव प्रचंड गलमाल मुंड, जय व्याघ्रवक्त्र कर्पूरवर्ण। शुभ नागफणी के कर्णफूल, से शोभित दोनो सौम्य कर्ण।। जय विगत मोह जय वैरागी, जय रुद्ररूप जय प्रलयंकर।। जय उमानाथ मदनारि शिवम, जय डमरूधर जय अभयंकर।। सितिकंठ शिखा पर नव मयंक,मस्तक में मंदाकिनि विहार। कैलाश कंदरा में निवसित, हिम आच्छादित गिरि के उभार।। जय परशुराम के गुरु गिरीश, गौरीश्वर जय छिति रूपंकर। जय उमानाथ मदनारि शिवम, जय डमरूधर जय अभयंकर।। सब रोग हरो हे! वैद्यनाथ, सब हरो शोक हे! विगत शोक। माया भ्रम काटो हे! महेश,मद मोह मयन को भी विलोक।। ब्रह्मांड नियोज...

शिवशंकर

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माँ

ग़ज़ल वही तो है कि जिससे वक्ष का श्रोणित पिलाया है। मुझे रोते बिलखते से मेरी माँ ने हँसाया है।। कई रातों वो सोई थी भरे गीले बिछौनों में, मुझे मरहम से तन पर थपकियाँ देकर सुलाया है। कभी लोरी कभी कजरी कभी किस्सों कहानी से, मेरे बचपन को सुंदर  संस्कारों से सज़ाया है।। नहीं माँगा कभी कुछ भी न कुछ एहसाँ जताया था, हमेशा नेह घट निःस्वार्थ माँ ने छलछलाया है। मुझे सबकुछ थमाकर और ख़ुद चलती बनी है माँ, किये आशीष की अब भी वो मेरे सर पे छाया है।। नहीं नश्वर है यह रिश्ता अनश्वर आत्म गठबंधन, सदा शाश्वत मेरी आत्मा ही माँ का 'नित्य' साया है। ✍🏾🍀🌹🍀🌹🍀 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

मुक्तक

[22/04, 15:01] नित्यानन्दवाजपेयीउपमन्यु🌹: विधाता छंद आधरित मुक्तक:- अधर की लालिमा से लाज खाते दल गुलाबों के। नयन दो झील या प्याले भरे दोनों शराबों के।। कमल दल से सुकोमल अंग आभा चंद्रिका जैसी। तुम्हारे नाज नखरे हैं वही जो हैं नवाबों के।। कमल को भीख में तुमने दिया है रंग यह अपना। दिखाया मोरनी मृग नागिनों को चाल का सपना।। सिखातीं क्षीरसागर को मनोभव सौम्यता तुम ही। तुम्हीं से सीख पाई जेष्ठ की दोपहर यूँ तपना।। तुम्हारे वाक हैं श्लोक गीता के परम पावन। चुनर धानी लहर जाए लगे ज्यों आ गया सावन।। तुम्हारा रूप वासंती चमकता चाँद है पीला। रँगीली राधिका हो तुम तुम्हारा श्याम रंगीला।। ✍🏾🎩🪘 नित्यानन्द वाजपेयी उपमन्यु [22/04, 18:49] नित्यानन्दवाजपेयीउपमन्यु🌹: मुक्तक उदासी छोड़ दो आओ तुम्हें हँसना सिखा दूँ मैं। हृदय में मीत के अपने तुम्हें बसना सिखा दूँ मैं।। बहुत मीठी बहुत मनहर चुभन है प्रेम की मधुमय। भ्रमर! तुमको कुसुम के अंक में फँसना सिखा दूँ मैं।। नित्यानन्द वाजपेयी उपमन्यु

ग़ज़ल

ग़ज़ल ज़िंदगी बनके मुझे प्यार सिखाने आई। छोड़कर सबको मेरा साथ निभाने आई।। इतने दुख-दर्द सहे तूने सृजन की ख़ातिर। ख़ुद सिमट कर मेरा विस्तार बढ़ाने आई। अपने पंखों की उड़ानों को मुझे सौंप दिया। आसमानों की मुझे सैर कराने आई।। मेरी हमदम तू मेरी हम नशीन बनकर के। मुझको हैवान से इंसान बनाने आई।। तू न होती तो फ़िज़ाओं में न रंगत होती। मुझसे मरुथल को गुलिस्तां सा सजाने आई।। ख़ुद तो शीशे सी कई बार है टूटी बिखरी। फिर भी पत्थर को तू भगवान बनाने आई।। मेरी हम-नफ़्स मेरी जाने तमन्ना है जो। 'नित्य' वो मुझमें सिमट करके समाने आई।। ✍🏾🌸🌸🌸🌸🌸🌸 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

राजीव दीक्षित

*छप्पय* मानवता के हेतु,भाव सेवा का लेकर। निकले श्री राजीव ,ज्ञान अंबुद विप्रेश्वर।। भारत को है गर्व ,पुत्र दीक्षित पर अपने। स्वाभिमान के नवल ,दिखाए जिसने सपने।। संभाषण से आपने,दिया अनोखा ज्ञान है। कम्पनियाँ परदेश की,जिनका कुचला मान है।। अंग्रेजी विष-वेल ,सोख लेती आरत को। अगर आपसा पुत्र, नहीं मिलता भारत को।। आयुर्वेदिक नींव, तुम्हीं ने थी दर्शाई। रामदेव ने भव्य ,पतंजलि जिसे बनाई।। जनजागृति के स्रोत तुम, ब्राम्हण पुत्र महान हो। जबतक सूरज चाँद हैं,तेरे यश का गान हो।। ✍🏾🌹🫐🌹 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'

ग़ज़ल

ग़ज़ल  तेरे चेहरे को खिलता कँवल कर गया। एक भँवरा जो तुझपर मचल कर गया।। बंद दर था दिले मैंक़दे का मग़र। दे के' दस्तक़ कोई तो दखल कर गया।। साँकलें तो लगी की लगी रह गईं। चोर चालाकियाँ दरअसल कर गया।। ख़त का मज़मूम भाँपा लिफ़ाफे से बस। कुछ तो उसमें भी रद्दोबदल कर गया।। छू गईं उसकी साँसे बदन को तेरे। ख़्वाब पर इस क़दर वो अमल कर गया।। बच के निकला कोई मैक़दे से अगर। डूब आँखों में तेरी फ़िसल कर गया।। चाँद बासंतिया क्यों पिघलने लगा। क्या चकोर इसके' मन को मसल कर गया।। 'नित्य' साग़र तड़पने लगा प्यास में। अश्क़ पैमानों' में जब पिघल कर गया।। ✍🏾🌹🍃🌹🍃🍃🌹 नित्यानन्द वाजपेयी 'उपमन्यु'