गीत
गीत *सुना है तुम भी किसी रब की बात करते हो।* *गलों को काट ये किस ढब की बात करते हो।।* न कोई दीन न ईमान कहेगा ऐसा। न तो इलाह न भगवान कहेगा ऐसा।। न जाने कौन से करतब की बात करते हो। *गलों को काट ये किस ढब की बात करते हो।।* वतन में चैन-ओ-अमन और सुकूं रहे वो' करो! सभी के साथ जियो और दिलों में प्यार भरो। मिटा के आम को मंसब की बात करते हो। *गलों को काट ये किस ढब की बात करते हो।।* वजूद मुल्क के बिन क्या कहीं तुम्हारा है। इसी ने पाला' क़दम दर क़दम संवारा है।। जला के इसको ही मज़हब की बात करते हो। *गलों को काट ये किस ढब की बात करते हो।।* ✍🏾🌹💓🌹🪷🪷🪷 नित्यानन्द वाजपेयी "उपमन्यु"